Looks at God's irony
First, He write our destiny and says whatever is written will happen, then he ask us to account for our actions
या तो किस्मत लिखी हैं, कर्म मायने रखता है
दोनों एक साथ चलेंगे तो सवाल उठेंगे ही
पहले कहते थे की -- सब उपरवाले ने लिखा हैं ,
फिर कहते हैं की -- तू ही जिम्मेरदार हैं !
वाह ! जबाबदेही भी हमारी और कण्ट्रोल भी उनका ?
सब कुछ पहले लिखा हैं तो गलती किसकी ?
और अगर कर्म जरुरी हैं तो किस्मत का ड्रामा क्यों ?
ईश्वर की मस्ती तो देखो
पहले हमारी किस्मत खुद लिखता हैं
और कहता हैं
जो लिखा हैं वही होगा
और फिर हमसे कर्मों का हिसाब भी मांगता हैं !